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PM Fasal Bima Yojana: फसल खराब होने पर किसानों को बीमा का पैसा कैसे मिलता है?

 

PM Fasal Bima Yojana

खेती-किसानी पर मौसम की मार सबसे बड़ा जोखिम है। बेमौसम बारिश, सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़ या कीट-रोग — कभी भी किसान की पूरी मेहनत पर पानी फेर सकते हैं। इसी जोखिम से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) शुरू की है। 2026 में यह योजना देश के किसानों के लिए सबसे बड़ी वित्तीय सुरक्षा कवच बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि किसान को बहुत कम प्रीमियम देना होता है — खरीफ फसलों पर सिर्फ 2% और रबी फसलों पर 1.5% — बाकी का पूरा प्रीमियम सरकार वहन करती है। लेकिन अक्सर किसानों को यह स्पष्ट नहीं होता कि फसल खराब होने के बाद बीमा का पैसा मिलता कैसे है? क्लेम कब और कहाँ करना होता है? इस लेख में हम इसी पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझेंगे।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत 13 जनवरी 2016 को हुई थी। इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाया जाता है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, सूखे, बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात, कीट-रोग आदि से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई करना है, ताकि किसान कर्ज़ के जाल में न फँसे और अगली फसल के लिए उसके पास पूँजी बची रहे। यह योजना उपज आधारित (yield-based) और मौसम आधारित (weather-based) दोनों तरह के बीमा कवर प्रदान करती है। पहले के किसान बीमा कार्यक्रमों की तुलना में यह काफी सरल, सस्ती और पारदर्शी है। अब तकनीक के इस्तेमाल से क्लेम का निपटारा भी तेज़ी से होता है।

बीमा कवर में क्या-क्या शामिल है?

योजना में कई तरह के जोखिम कवर किए जाते हैं। इन्हें समझना ज़रूरी है ताकि क्लेम के समय भ्रम न हो।

1. उपज हानि (Yield Loss)

यदि किसी क्षेत्र में बुआई से लेकर कटाई तक किसी प्राकृतिक कारण से फसल की वास्तविक उपज, थ्रेसहोल्ड उपज (threshold yield) से कम रहती है, तो सभी बीमित किसानों को मुआवजा मिलता है। यह नुकसान का सबसे बड़ा और सामान्य कारण है — सूखा, बाढ़, बेमौसम बारिश आदि।

2. बुआई न हो पाना (Prevented Sowing)

अगर किसी क्षेत्र में बारिश न होने या अधिक बारिश के कारण किसान निर्धारित समय में बुआई ही नहीं कर पाता, तो उसे कुल बीमित राशि का अधिकतम 25% तक मुआवजा दिया जाता है।

3. फसल कटाई के बाद नुकसान (Post-Harvest Loss)

कटाई के बाद खेत में रखी फसल को चक्रवाती बारिश, बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि से नुकसान होता है, तो अधिकतम 14 दिनों तक के लिए अतिरिक्त कवर मिलता है।

4. स्थानीय आपदाएँ (Localized Calamities)

ओलावृष्टि, भूस्खलन, बादल फटने या जलभराव जैसी स्थानीय घटनाओं से हुए नुकसान का मुआवजा अलग से दिया जाता है। इसके लिए किसान को 72 घंटे के भीतर सूचना देनी होती है।

5. मौसम आधारित बीमा (Weather Index Insurance)

कुछ फसलों और क्षेत्रों में उपज की जगह मौसम के मापदंडों (जैसे वर्षा, तापमान, आर्द्रता) के आधार पर मुआवजा तय होता है। यदि मौसम का आँकड़ा तय सीमा से बाहर जाता है, तो क्लेम स्वतः जारी हो जाता है।

किसान को कितना प्रीमियम देना होता है?

यही इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है। किसान का योगदान बहुत मामूली रखा गया है:

फसल श्रेणीकिसान का प्रीमियम (अधिकतम)शेष प्रीमियम कौन देता है?
खरीफ फसलें (धान, मक्का, सोयाबीन, कपास आदि)2% बीमित राशि काकेंद्र और राज्य सरकार
रबी फसलें (गेहूँ, चना, सरसों आदि)1.5% बीमित राशि काकेंद्र और राज्य सरकार
बागवानी/व्यावसायिक फसलें (फल, सब्ज़ी, मसाले)5% बीमित राशि काकेंद्र और राज्य सरकार

शेष प्रीमियम का भुगतान सरकारें सब्सिडी के रूप में सीधे बीमा कंपनी को करती हैं। इसका मतलब है कि किसान को मात्र ₹100 की बीमित राशि पर ₹2 या ₹1.5 जैसा मामूली प्रीमियम देना होता है।

क्लेम की प्रक्रिया — फसल खराब होने पर पैसा कैसे मिलता है?

यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्लेम की प्रक्रिया नुकसान के प्रकार पर निर्भर करती है।

A. उपज हानि के लिए (सामान्य क्लेम)

इसमें किसान को अलग से आवेदन करने की ज़रूरत नहीं होती। प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है:

  1. क्रॉप कटिंग प्रयोग (CCE): संबंधित राज्य सरकार का राजस्व/कृषि विभाग फसल कटाई के समय चुनिंदा खेतों में क्रॉप कटिंग प्रयोग करता है। इसमें उपज का आकलन किया जाता है।

  2. औसत उपज की गणना: इन प्रयोगों के आधार पर पूरे बीमा इकाई (गाँव/पटवार सर्कल) की औसत उपज निकाली जाती है।

  3. थ्रेसहोल्ड उपज से तुलना: यदि वास्तविक औसत उपज, थ्रेसहोल्ड उपज से कम है, तो अंतर के अनुपात में मुआवजा तय होता है।

  4. भुगतान: सभी बीमित किसानों के बैंक खातों में DBT के माध्यम से मुआवजा सीधे भेज दिया जाता है।

B. स्थानीय आपदाओं के लिए (ओला, बाढ़, बादल फटना)

  • ऐसी घटना होते ही किसान को 72 घंटों के भीतर सूचना देनी चाहिए।

  • सूचना देने के तरीके:

    • नज़दीकी कृषि विभाग कार्यालय में जाकर

    • बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर

    • फसल बीमा पोर्टल या मोबाइल ऐप के ज़रिये

  • बीमा कंपनी के सर्वेक्षक खेत का निरीक्षण करते हैं।

  • नुकसान का आकलन होकर मुआवजा सीधे खाते में भेजा जाता है।

C. बुआई न हो पाने पर

  • यदि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण बुआई की तिथि निकल जाती है, तो किसान को अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी को सूचना देनी चाहिए।

  • क्षेत्रवार स्थिति का आकलन किया जाता है और बीमा कंपनी मुआवजा जारी करती है।

D. कटाई के बाद नुकसान

  • यदि कटी हुई फसल खेत में सुखाने के लिए रखी गई हो और चक्रवाती बारिश/ओलावृष्टि से खराब हो जाए, तो 48-72 घंटे के भीतर सूचना दें।

  • सर्वे के बाद अतिरिक्त मुआवजा मिलता है।

क्लेम का पैसा कब मिलता है?

  • उपज हानि के सामान्य क्लेम: फसल के सीज़न समाप्त होने के बाद, क्रॉप कटिंग प्रयोग और डेटा जाँच के बाद मुआवजा जारी होता है। सामान्यतः खरीफ के लिए दिसंबर-मार्च और रबी के लिए जून-सितंबर तक भुगतान हो जाता है।

  • स्थानीय आपदाएँ और बुआई न होना: सूचना और सर्वे के बाद अपेक्षाकृत जल्दी (कुछ हफ्तों से 2-3 महीने) भुगतान हो जाता है।

  • भुगतान सीधे आधार लिंक बैंक खाते में DBT से भेजा जाता है।

कौन पात्र है और आवेदन कैसे करें?

  • पात्रता: वे सभी किसान जिनके नाम पर खेती योग्य भूमि है और जिन्होंने अधिसूचित फसलों की बुआई की है। काश्तकार किसान भी आवेदन कर सकते हैं।

  • आवेदन का समय: आमतौर पर खरीफ के लिए जुलाई-अगस्त और रबी के लिए नवंबर-दिसंबर तक आवेदन किया जा सकता है। राज्यवार तिथियाँ अलग हो सकती हैं।

आवेदन के तरीके

  1. बैंक शाखा में: यदि आपने फसली ऋण लिया है, तो बैंक स्वतः आपका बीमा कर देता है। पासबुक में प्रीमियम की कटौती दिखती है।

  2. ऑनलाइन पोर्टल: pmfby.gov.in पर जाकर स्वयं आवेदन कर सकते हैं।

  3. CSC केंद्र: नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर से भी आवेदन कराया जा सकता है।

  4. कृषि विभाग: ग्राम पंचायत स्तर पर कृषि सहायक से संपर्क करें।

ज़रूरी दस्तावेज़

  • आधार कार्ड

  • भूमि स्वामित्व या काश्तकारी प्रमाण

  • बैंक खाता पासबुक (आधार से लिंक)

  • बुआई प्रमाण (स्व-घोषणा या कृषि अधिकारी का प्रमाण)

  • फसल का नाम और क्षेत्रफल

2026 में योजना से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

  • योजना अब स्वैच्छिक है — सभी किसान चाहें तो आवेदन कर सकते हैं, चाहे उन्होंने फसली ऋण लिया हो या नहीं।

  • तकनीक का उपयोग: उपज अनुमान में अब ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग का उपयोग बढ़ गया है, जिससे क्लेम प्रक्रिया अधिक सटीक और तेज़ हुई है।

  • यूनिट स्तर: कई राज्यों में बीमा इकाई अब गाँव/पंचायत स्तर तक कर दी गई है, जिससे मुआवजा अधिक न्यायसंगत बनता है।

  • समय पर सूचना दें: स्थानीय आपदा या कटाई के बाद नुकसान में निर्धारित समय (48-72 घंटे) के भीतर सूचना न देने पर क्लेम अस्वीकृत हो सकता है।

  • शिकायत निवारण: क्लेम न मिलने या कम मिलने पर राज्य स्तरीय शिकायत समिति, बीमा लोकपाल या कृषि विभाग से संपर्क करें।

Frequently Asked Questions

PM Fasal Bima Yojana में किसान को कितना प्रीमियम देना होता है?

खरीफ फसलों पर बीमित राशि का अधिकतम 2%, रबी पर 1.5% और बागवानी/व्यावसायिक फसलों पर 5%। शेष प्रीमियम सरकार वहन करती है।

फसल पूरी तरह खराब हो जाए तो कितना मुआवजा मिलता है?

पूर्ण नुकसान पर बीमित राशि के हिसाब से मुआवजा मिलता है, लेकिन यह फसल की लागत, क्षेत्रफल और नुकसान के आकलन पर निर्भर करता है।

क्या बिना फसली ऋण वाले किसान भी बीमा करा सकते हैं?

हाँ, यह योजना अब स्वैच्छिक है। कोई भी किसान — चाहे उसने ऋण लिया हो या नहीं — आवेदन कर सकता है।

क्लेम दाखिल करने की आखिरी तारीख क्या है?

उपज हानि के लिए किसी अलग क्लेम की ज़रूरत नहीं होती। स्थानीय आपदाओं के लिए घटना के 72 घंटे के भीतर और कटाई के बाद के नुकसान के लिए 48 घंटे के भीतर सूचना देनी होती है।

क्लेम का पैसा कहाँ आता है?

मुआवजा सीधे किसान के आधार से लिंक बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजा जाता है।

अगर बीमा कंपनी क्लेम का पैसा न दे तो क्या करें?

पहले कृषि विभाग से संपर्क करें। उसके बाद राज्य स्तरीय शिकायत समिति, बीमा लोकपाल या उपभोक्ता अदालत का दरवाज़ा खटखटाया जा सकता है।

क्या सभी फसलें इस योजना में शामिल हैं?

राज्य सरकार हर सीज़न में अधिसूचित फसलों की सूची जारी करती है। अधिकांश खाद्यान्न, तिलहन, दलहन और बागवानी फसलें शामिल होती हैं।


Sources / References:

  • PM Fasal Bima Yojana Official Portal – pmfby.gov.in

  • Ministry of Agriculture & Farmers Welfare, Government of India – PMFBY Operational Guidelines

  • Department of Agriculture, Cooperation & Farmers Welfare – Crop Insurance Division

  • Press Information Bureau (PIB) – PMFBY scheme updates and claim settlement reports (latest available up to 2026)

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